जय श्री सदगुरु बापू आसारामजी. सदगुरु चरणों में बैठाने से जो बल मिलता हैं उससे सभी वृत्तियां स्वकेंद्रित होकर स्थिर हो जाती हैं इसलिये शास्त्र कहते हैं कि यथाक्रम प्राप्त किये गुरू क अनुग्रह से ही आत्मा का दर्शन किया जा सकता हैं दुसरे किसी भी प्रकार क सामर्थ्य से उसका दर्शन नहीं किया जा सकता
श्री रमण महर्षि
Sunday, September 23, 2007
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